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Shri Ganesh Chaturthi 2021 , Pooja Vidhi ,Ganesh Visharjan

सनातन धर्म के आदि पंच देवों में श्री गणेश एक प्रमुख देव माने जाते हैं | भगवान गणेश रिद्धि सिद्धि के दाता और शुभ लाभ के प्रदाता माने गए वह भक्तों की बाधा संकट रोग दोष तथा दरिद्रता को दूर करते हैं | शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि ,श्री गणेश जी की विशेष पूजा का दिन बुधवार है वही प्रथम पूज्य श्री गणेश का प्रमुख त्योहार Ganesh Chaturthi माना जाता है ,जो भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मनाया जाता है |
Shri Ganesh Chaturthi 2021 , Pooja Vidhi ,Ganesh Visharjan

Ganesh Chaturthi 2021 

मान्यता है कि गणेश जी का जन्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी को मध्याह्न काल में सोमवार स्वाति नक्षत्र एवं सिंह लग्न में हुआ था | इसलिए यह चतुर्थी मुख्य ganesh chaturthi या विनायक चतुर्थी कहलाती है |इस साल यानी 2021 में यह ganesh chaturthi का पाठ 10 सितंबर 2021 शुक्रवार को मनाया जाएगा|


Ganesh Chaturthi 2021:  व्रत और पूजन विधि


इस दिन व्रती या भक्त को चाहिए कि प्रातः स्नान करने के बाद सोने ,तांबे ,मिट्टी के गणेश प्रतिमा ले ,
एक कोरे कलश में जल भरकर उसके मुंह पर कोरा वस्त्र बांधकर उसके ऊपर गणेश जी को विराजमान करें ,गणेश जी को सिंदूर में दूर्वा अर्पित करके 21 लड्डुओं का भोग लगाएं इनमें से पांच लड्डू गणेश जी को अर्पित करके शेष लड्डू गरीबों या ब्राह्मणों को बांट दे |


साए काल के समय गणेश जी का पूजन करना चाहिए | Ganesh chaturthi की कथा गणेश चालीसा आरती पढ़ने के बाद आपने दृष्टि को नीचे रखते हुए चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिए| इस दिन गणेश जी के सिद्धिविनायक रूप की पूजा व्रत किया जाता है |

श्री गणेश चतुर्थी का महत्व


ganesh chaturthi का महत्व माना जाता है कि, भगवान श्रीकृष्ण पर स्यन्मन्तक मणि चोरी करने का झूठा कलंक लगा था और वे अपमानित हुए थे| नारद जी ने उनकी यह दुर्दशा देखकर उन्हें बताया कि उन्होंने भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गलती से चंद्र दर्शन किया था| इसलिए वे त्रिस्क्रित हुए थे |नारद मुनि ने उन्हें यह भी बताया कि इस दिन चंद्रमा को गणेश जी ने श्राप दिया |


इसलिए जो इस दिन चंद्र दर्शन करता है ,उस पर मिथ्या कलंक लगता है |नारद मुनि की सलाह पर श्रीकृष्ण ने ganesh chaturthi का व्रत किया और दोष मुक्त हुए इसलिए इस दिन पूजा का व्रत करने से व्यक्ति को झूठे आरोपों से मुक्ति मिलती है |

संकट गणेश चतुर्थी कब होती है |


भारतीय संस्कृति में गणेश जी को विद्या बुद्धि का प्रदाता, विघन विनाशक ,मंगलकारी रक्षा कारक ,सिद्धि दायक, समृद्धि शक्ति और सम्मान प्रदायक माना जाता है| वैसे तो प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकट ganesh chaturthi कहते है|

विनायकी गणेश चतुर्थी कब होती है |


वह शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनयाकी ganesh chaturthi मनाई जाती है |लेकिन वार्षिक ganesh chaturthi को गणेश जी के प्रकट होने के कारण उनके भक्त इस तिथि के आने पर उनकी विशेष पूजा करके पुण्य अर्जित करते हैं |

अंगारक गणेश चतुर्थी कब होती है |


अगर मंगलवार को यह ganesh chaturthi आए तो उसे अंगारक चतुर्थी कहते हैं |जिसमें पूजा व्यर्थ करने से अनेक पापों का शमन होता है, अगर रविवार को यह चतुर्थी पड़े तो भी बहुत शुभ व श्रेष्ठ फलदाई मानी गई है|

महाराष्ट्र : गणेश चतुर्थी 

महाराष्ट्र में यह पर्व गणेश उत्सव के तौर पर मनाया जाता है |जो कि 10 दिन तक चलता है और अनंत चतुर्दशी पर समाप्त होता है |इस दौरान गणेश जी को भव्य रूप से सजाकर उनकी पूजा की जाती है ,अंतिम दिन गणेश जी की ढोल नगाड़ों के साथ झाकिया निकाल कर उन्हें जल में विसर्जित किया जाता है|

गणेश चतुर्थी पर चन्द्र दर्शन क्यों नही करने चाइये |

मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा का दर्शन नहीं करना चाहिए वरना कलंक का भागी होना पड़ता है ,अगर भूल से चंद्र दर्शन हो जाए तो इस दोष के निवारण के लिए मंत्र का 28,54 या 108 बार जाप करना चाहिए|
श्रीमद्भागवत के दसवें स्कंध के ५७वे अध्याय का पाठ करने से भी चंद्र दर्शन का दोष समाप्त हो जाता है ,याद रखें तुलसी के पत्ते गणेश पूजा में इस्तेमाल नहीं हो तो उसी को छोड़कर बाकी सब फल फूल गणेश जी को प्रिय है |गणेश पूजन में गणेश जी की एक परिक्रमा करने का विधान है ,मतांतर से गणेश जी की तीन परिक्रमा भी की जाती हैं|

श्री गणेश स्त्रोतम 

प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम् ।। भक्तावासं स्मरेनित्यमायु:सर्वकामार्थसिध्दये ।।1।।
प्रथमं वक्रतुंड च एकदन्तं द्वितीयकम्। तृतीयं कृष्णपिंगाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम्।। 2।।
लंबोदरं पंचमं च षष्ठं विकटमेव च। सप्तमं विघ्न राजेन्द्रं धूम्रवर्णं तथाष्टमम्।। 3।।
नवमं भालचंद्रं च दशमं तु विनायकम्। एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम्।। 4।।
द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्यं यः पठेन्नरः। न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिध्दिकरं प्रभो।। 5।।
विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम्। पुत्रार्थी लभते पुत्रान् मोक्षार्थी लभते गतिम्।। 6।।
जपेत् गणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासैः फलं लभेत्। संवत्सरेण सिध्दिं च लभते नात्र संशयः।। 7।।
अष्टभ्यो ब्राम्हाणेभ्यश्च लिखित्वा यः समर्पयेत्। तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतः।। 8।।
इति श्री नारदपुराणे संकटनाशनं नाम महागणपतिस्तोत्रं संपूर्णम्।

गणेश चालीसा दोहा 


जय गणपति सदगुण सदन कविवर बदन कृपाल ।

विघ्न हरण मंगल करण जय जय गिरिजालाल ।।

जय गणपति सदगुण सदन कविवर बदन कृपाल ।

विघ्न हरण मंगल करण जय जय जय गिरिजा लाल।।


गणेश चालीसा चौपाई

जय जय जय गणपति गण राजू ।

मंगल भरण करण शुभ काजू।।


जय गज बदन सनम सुखदाता।

विश्व विनायक बुद्धि विधाता ।।


वक्रतुंड शुची शुंड शुहावन।

तिलक त्रिपुंड भाल मन भालमन भावन।।


राजत मणि मुक्तन और माला ।

स्वर्ण मुकुट सिर नयन विशाला।।


पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूल ।

मोदक भोग सुगंधित फूल।।


सुंदर पितांबर तन साजित ।

चरण पादुका मुनि मन राजित ।।


धनी शिवसुवन षडानन भ्राता ।

गोरी ललन विश्वविख्याता ।।


रिद्धि सिद्धि तव चंवर सुधारे।

 मूषक वाहन सोहत द्वारे।।


कहो जन्म शुभ कथा तुम्हारी ।

अति शुचि पावन मंगलकारी।।


एक समय गिरिराज कुमारी।

 पुत्र हेतु तप कीनो भारी।।


भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा ।

तब पहुछ्यो धरि दीज रूपा।।


अतिथि जानि कै गौरि सुखारी।

 बहू विधि सेवा करी तुम्हारी।।


अति प्रसन्न है तुम वर दीनना ।

मातु पुत्र हित जो तप किन्हl।।


मिल ही पुत्र तुहि बुद्धि विशाला।

बिना गर्भधारण, यही काला।।


गणनायक गुण ज्ञान निभाना ।

पूजित प्रथम रूप भगवाना।।


अस कहि अंतर्धान रुप है ।

पलना पर बालक स्वरूप है।।


बनि शिशु , रूदन जबही तुम ठाना ।

लखि मुख सुख नहीं गोरी समाना ।।


सकल मगन सुखमंगल गावहीं ।

नभ ते सुरन सुमन वर्षाव्ही ।।


शंभू उमा बहु दान लुटावहीं ।

सुर मुनि जन सूत देखन आवही ।।


लखि अति आनंद मंगल साजा ।

देखन भी आए शनी राजा ।।


निज अवगुण गुणी शनि मन माही ।

बालक देखन चाहत नाहीं ।।


गिरिजा कछु मन भेद बढ़ायो ।

उत्सव मोर ,न शनि तुहि भायो ।।


कहत लगे शनि मन सकुचाई ।

का करि हौ शिशु मोहि दिखाई ।।


नहीं विश्वास उमा ऊर भयऊ ।

शनी सों बालक देखन कहेयऊ ।।


पंडितहि शनि दृग कोण प्रकाशा ।

बोलक सिर उड़ी गयो अकाशा ।।


गिरिजा गिरीं विकल हवें धरणी ।

सो दुख दशा गयो नहीं वरणी ।।


हाहाकार मचो कैलाशा ।

शनि किन्हो लाखि सूत को नासा ।।


तुरत गरुड़ चढ़ी विष्णु सीधायो । 

काटि चक्र सो गज सिर लायो ।।


बालक के धड़ ऊपर धारियों ।

प्राण मंत्र पड़ी शंकर डारियो ।।


नाम गणेश शंभु तब किन्हें ।

प्रथम पूज्य बुद्धि निधि वर दिन्हे ।।


बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा । 

पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीना ।।


चले षडानन भरमि भुलाई ।

रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई ।।


चरण मातो पीतो के धर लिन्हे ।

तीनके सात प्रादक्षिण किन्हें ।।


धनि गणेश कहि शिव हिय हर्षे ।

नभ ते सुरन सुमन बहू बरसे ।।


तुम्हारी महिमा बुद्धि बढ़ाई ।

शेष सहस मुख सके न गाई ।।


मैं मती हीन मलीन दुखारी ।

करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी ।।


भजन राम सुंदर प्रभु दासा ।

जग प्रयाग ककरा दुर्वासा ।।


अब प्रभु दया दिन पर कीजै ।

अपनी शक्ति भक्ति कछु दीजै ।।


गणेश चालीसा समाप्तम दोहा


श्री गणेश या चालीसा पाठ करे करे ध्यान ।

नित नव मंगल गृह बसै लगे जगत सन्मान ।।

संबंध अपने सहस्त्र दश ऋषि पंचमी दिनेश ।

पूरण चालीसा भयो मंगल मूर्ति गणेश ।।

गणेश आरती 

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ।।


लड्डून का भोग लगे संत करें सेवा ।

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ।।


एकदंत दयावंत चार भुजाधारी ।

मस्तक सिंदूर सोहे मूसे की सवारी ।।


जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ।।


अंधन को आंख देत कोढ़ीन को काया । 

भाजन को पुत्र देत निर्धन को माया ।।


जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ।।


पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा ।

सूरदास शरण आए सफल कीजे सेवा ।।


जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ।।


दीनान की लाज राखो शंभु सुत वारी । 

कामना को पूरा करो जग बलिहारी ।।


गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ।।


|| गणेश जी महाराज की जय हो ||


गणेश जी आपकी हर मनोकामना पूरी करे | comment में जय श्री गणेश जरुर लिखे |धन्यवाद




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